नई दिल्ली | इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 के एक विशेष सत्र में स्वायत्त प्रणालियों, भौतिक एआई और रोबोटिक्स पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित इस कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और यह परखा कि ये उभरती हुई तकनीकें निकट भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों की दिशा को कैसे बदल देंगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे ने इस सत्र का उद्घाटन किया और अपने संबोधन में उद्योग जगत, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के बीच मजबूत तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रीय मिशन और उद्योग का सहयोग
प्रोफेसर वाघमारे ने अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों पर डीएसटी के राष्ट्रीय मिशन का जिक्र करते हुए बताया कि देश भर के 25 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र प्रयोगशालाओं के विचारों को बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस मिशन का पहला चरण दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाला है, और इस सत्र की चर्चाओं से मिलने वाली प्रतिक्रिया से इसके दूसरे चरण की योजनाओं को आकार देने में मदद मिलेगी। इस दौरान नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि भौतिक एआई केवल एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चुनौती नहीं, बल्कि एक जटिल सिस्टम इंजीनियरिंग चुनौती भी है।
सुरक्षा और भविष्य की संभावनाएं
प्रो. करंदीकर ने रेखांकित किया कि भौतिक एआई सिस्टम संवादात्मक एआई उपकरणों से पूरी तरह भिन्न हैं, क्योंकि कारखानों या स्वायत्त वाहनों में रोबोट से जुड़ी किसी भी त्रुटि के तत्काल भौतिक परिणाम हो सकते हैं। इसलिए विश्वसनीयता, सत्यापन और सुरक्षा इस क्षेत्र के अनुसंधान में सबसे ऊपर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास सिस्टम इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और सॉफ्टवेयर में अपनी क्षमताओं को मजबूत करके स्वायत्त प्रणाली विकसित करने का एक सुनहरा अवसर है। सत्र में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय रूप से अपनी राय रखी।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB










