नई दिल्ली | वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण प्रणाली का खुलासा किया है, जो यह बताती है कि तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल के आसपास का पदार्थ (एक्रिशन डिस्क) अत्यधिक दोलन करने वाले एक्स-रे का उत्सर्जन क्यों करता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट रिसर्च Institute of Observational Sciences (ARIES) के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन को अंजाम दिया है। यह शोध उन कारणों को स्पष्ट करता है कि कैसे एक स्पिनिंग ब्लैक होल के चारों ओर अभिवृद्धि झटकों के दोलन आवृत्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करते हैं।
कंप्यूटर सिमुलेशन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
इस अध्ययन के लिए एआरआईईएस में न्यूमेरिकल एंड सैद्धांतिक एस्ट्रोफिजिक्स ग्रुप द्वारा विकसित एक कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया गया, जो ब्लैक होल के चारों ओर चिपचिपे एक्रिशन प्रवाह के व्यवहार को मॉडल करता है। इस कार्य में पोलैंड के निकोलस कोपरनिकस एस्ट्रोनॉमिकल सेंटर और बरेली के एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल रहे, जिनका नेतृत्व एआरआईईएस के श्री सनित देबनाथ और डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय ने किया। यह अध्ययन हाल ही में जर्नल ऑफ हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स (जेएचईएपी) में प्रकाशित हुआ है।
स्पिन और क्यूपीओ आवृत्तियों का प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि जब एक्रिशन प्रवाह की चिपचिपाहट एक निश्चित महत्वपूर्ण मूल्य से अधिक हो जाती है, तो डिस्क का झटका अस्थिर होकर दोलन करने लगता है, जिससे अर्ध-आवधिक दोलनों (क्यूपीओ) के रूप में प्रकाश की झिलमिलाहट पैदा होती है। अध्ययन से पता चला कि धीरे-धीरे घूमने वाले ब्लैक होल मुख्य रूप से कम आवृत्ति वाले क्यूपीओ उत्पन्न करते हैं, जबकि तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल झटके को अपने करीब खींचकर आवृत्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला पर क्यूपीओ का उत्पादन करते हैं।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB






