नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत की समृद्ध आनुवंशिक विविधता में जीन अनुसंधान के लिए देश को एक महत्वपूर्ण वैश्विक संसाधन बनाने की अपार क्षमता है। आने वाले वर्षों में अन्य राष्ट्र भी भारत के अद्वितीय आनुवंशिक संसाधनों की ओर देख रहे हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 में सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर एक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
जैव प्रौद्योगिकी और घरेलू क्षमताओं का विकास
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण और भारत की वैज्ञानिक शक्तियों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की उल्लेखनीय आनुवंशिक और फीनोटाइपिक विविधता रोग पैटर्न में भिन्नताओं को समझने और स्वास्थ्य सेवा में नई संभावनाओं की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। मंत्री ने जीन संश्लेषण में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के महत्व पर भी बल दिया।
अनुसंधान और अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने अनुसंधान और नवाचार को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विभिन्न विशेषज्ञता क्षेत्रों के बीच अंतर्विषयक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बात की। इस सत्र में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले सहित कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











