नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम जिले के एक 25 वर्षीय युवा की नशा मुक्ति और जीवन के नए सफर की कहानी सामने आई है। स्नातक अयान (बदला हुआ नाम) ने दोस्तों के प्रभाव में आकर पहले गांजा लेना शुरू किया था, जो धीरे-धीरे हेरोइन की गंभीर लत में बदल गया। यह सिलसिला लगभग पांच साल तक चला, जिसके कारण उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ा। इस लंबे संघर्ष के दौरान उनका ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो गई और उनका आत्मविश्वास पूरी तरह खत्म हो गया। परिवार पर गहरा भावनात्मक और आर्थिक बोझ पड़ने के बाद, परिजनों के सहयोग से उन्हें कुलगाम स्थित एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) भेजा गया।
एटीएफ कुलगाम में मिला चिकित्सा उपचार और परामर्श
एटीएफ कुलगाम में अयान का विशेष इलाज किया गया, जहां उन्हें चिकित्सा उपचार के साथ-साथ नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श भी मिला। चिकित्सा टीम और काउंसलरों की देखरेख में उन्हें नशा छोड़ने के दौरान होने वाली तकलीफों का प्रबंधन करना सिखाया गया। इस संपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य दोबारा नशा करने की प्रवृत्ति को रोकना, मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के स्वस्थ तरीके सिखाना और उनके खोए हुए आत्मविश्वास को फिर से जगाना था। प्रेरणादायक परामर्श और व्यवहार संबंधी सहयोग ने उन्हें नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने में मदद की।
परिवार के सहयोग और पेशेवर मदद से मिली सफलता
मेडिकल टीम, काउंसलरों और परिवार के संयुक्त प्रयासों से अयान की रिकवरी की प्रक्रिया सफल रही। नियमित फॉलो-अप और सकारात्मक माहौल के कारण वह धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़े और समाज में फिर से घुलने-मिलने लगे। आज वह एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, अपने परिवार के साथ दोबारा भरोसा कायम कर चुके हैं और एक सकारात्मक भविष्य की ओर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। एटीएफ कुलगाम का यह अनुभव साबित करता है कि सुलभ इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास के माध्यम से युवा नशे की जकड़ से बाहर निकल सकते हैं और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











