नई दिल्ली | राजस्थान के 27 वर्षीय स्वच्छता कर्मी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (एनएएमएएसटीई) योजना की मदद से सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हैं। उनका यह सफर इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छता कर्मियों के जीवन को संवारने में कार्यस्थल की सुरक्षा, श्रम की गरिमा और संस्थागत समर्थन कितना अहम होता है। समय पर मिलने वाली इस कल्याणकारी सहायता ने उनके और उनके परिजनों के जीवन में एक सार्थक बदलाव लाने का काम किया है।
चुनौतियां और व्यावसायिक खतरे
एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाले और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रमेश को अपनी आजीविका चलाने तथा परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीवर कर्मी के रूप में उनके दैनिक कार्यों में कई तरह के गंभीर व्यावसायिक खतरे शामिल थे, क्योंकि उन्हें अक्सर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना होता था। पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई की अनुपस्थिति के कारण उनके काम से जुड़े जोखिम बहुत अधिक थे। इन तमाम बाधाओं के बावजूद, वह अपने परिवार के हालात सुधारने और अधिक सुरक्षा तथा सम्मान के साथ जीने के लिए पूरी तरह दृढ़ संकल्पित रहे।
एनएएमएएसटीई योजना से मिली सुरक्षा
वर्ष 2025 में एनएएमएएसटीई योजना के तहत रमेश को उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा मजबूत करने के वास्ते एक पीपीई किट और सुरक्षा किट प्रदान की गई। इस महत्वपूर्ण सहायता से उन्हें काम के लिए आवश्यक उपकरण मिले, जिससे सुरक्षित तरीके से स्वच्छता कार्य करने के महत्व को और अधिक बल मिला। इस मदद के परिणामस्वरूप अब वह अधिक आत्मविश्वास और सुदृढ़ सुरक्षा भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर पा रहे हैं। इस पहल ने कार्यस्थल की चिंताओं को दूर करने के साथ-साथ जोखिमों को कम किया है, जिससे उनकी आजीविका की सुरक्षा और परिवार के जीवन-स्तर में सुधार हुआ है। यह योजना स्वच्छता कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











