नई दिल्ली | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम यानी नमस्ते योजना स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, संरक्षा और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से सेप्टिक टैंकों और सीवर से जुड़े कार्यों में लगे कर्मियों को न केवल आवश्यक संसाधन मिल रहे हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक पहचान और गरिमा भी प्राप्त हो रही है।
चुनौतियों से भरा था स्वच्छता कर्मियों का सफर
अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 37 वर्षीय रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) जैसे सहायक सेप्टिक टैंकों से मल कीचड़ निकालने के कार्य में गंभीर व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करते आए हैं। खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों, सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी और कल्याणकारी सुविधाओं तक सीमित पहुंच ने उनके इस पेशे को बेहद जोखिम भरा बना दिया था। काम से जुड़े इन भारी खतरों के अलावा उन्हें सामाजिक कलंक, कम वेतन और आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता था, जबकि उनके कंधों पर अपने वृद्ध माता-पिता सहित पूरे परिवार के भरण-पोषण की बड़ी जिम्मेदारी भी थी। उचित सुरक्षा उपकरणों के अभाव और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों की सीमित जानकारी के बावजूद उनकी हमेशा से यही आकांक्षा थी कि वे सम्मानपूर्वक अपना कार्य जारी रखें और अपने परिवार के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर सकें।
नमस्ते योजना से जीवन में आया सार्थक बदलाव
वर्ष 2025-26 के दौरान इस दिशा में बड़ा मोड़ आया जब नमस्ते योजना के तहत उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई किट, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड और कौशल एवं सुरक्षा से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इन सभी सुविधाओं के मिलने से उनकी कार्य परिस्थितियों और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे अधिक सुरक्षित तरीके से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में भी कुछ हद तक वृद्धि दर्ज की गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इस प्रकार की पहलों के जरिए एक अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और गरिमापूर्ण स्वच्छता व्यवस्था के अपने विजन को लगातार आगे बढ़ा रहा है ताकि हर स्वच्छता कर्मी को उसका वाजिब सम्मान और सुरक्षा मिल सके।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











