नई दिल्ली | अंतर्राष्ट्रीय स्तन कैंसर जागरूकता माह के मौके पर डाक विभाग ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष स्मारक डाक टिकट और चित्र पोस्टकार्ड का एक सेट जारी किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डाक विभाग के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करके बीमारी का जल्द पता लगाने, बचाव संबंधी स्वास्थ्य देखभाल और जन-जागरूकता के संदेशों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है। इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव और डाक सेवा महानिदेशक मनीषा सिन्हा ने मिलकर इन डाक टिकटों का अनावरण किया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन टिकटों और पोस्टकार्डों के लिए तकनीकी इनपुट, संदर्भ सामग्री और पृष्ठभूमि की जानकारी उपलब्ध कराई है।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जांच के आंकड़े
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने महिलाओं के स्वास्थ्य को स्वस्थ परिवारों और राष्ट्र की नींव बताया। उन्होंने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के तहत किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इसके अंतर्गत देश के 1.8 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मुंह, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि एनपी-एनसीडी कार्यक्रम के तहत पूरे देश में इन तीनों प्रकार के कैंसर के लिए कुल 86.97 करोड़ जांच की जा चुकी हैं। इनमें मुंह के कैंसर के लिए 49.02 करोड़, स्तन कैंसर के लिए 22.90 करोड़ और सर्वाइकल कैंसर के लिए 14.05 करोड़ जांच शामिल हैं। वर्तमान में इन बीमारियों से पीड़ित 5.50 लाख लोगों का इलाज चल रहा है, जिसमें मुंह के कैंसर के 2.70 लाख, स्तन कैंसर के 1.43 लाख और सर्वाइकल कैंसर के 1.37 लाख मरीज शामिल हैं।
स्तन कैंसर की स्थिति और शुरुआती जांच का महत्व
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 में देश में स्तन कैंसर के दो लाख से अधिक नए मामले सामने आए हैं और हर 29 में से एक महिला को इस बीमारी का खतरा है। महिलाओं में होने वाले सभी नए कैंसर मामलों में स्तन कैंसर 30% से अधिक है, जो इसे महिलाओं में सबसे आम कैंसर बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर निदान होने पर स्तन कैंसर के लगभग एक-तिहाई मामलों को रोका जा सकता है और एक-तिहाई का इलाज संभव है। सरकार द्वारा ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के तहत एनपी-एनसीडी पोर्टल और ‘आभा’ आईडी जैसी डिजिटल सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं ताकि स्वास्थ्य रिकॉर्ड आसानी से मिल सकें और इलाज की निरंतरता बनी रहे। अधिकारियों ने महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित जांच कराएं और बीमारी का समय रहते पता लगाने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB







