नई दिल्ली | केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित जैव विविधता संधि (सीबीडी) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (कॉप-17) के दौरान वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को प्रभावी कार्यान्वयन, सतत वित्तपोषण और दीर्घकालिक संरक्षण परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ साझेदारी में किया गया। इस अवसर पर आर्मेनिया गणराज्य के पर्यावरण मंत्री और सीबीडी कॉप-17 के अध्यक्ष श्री हम्बार्जुम मातेवोस्यान तथा सीबीडी सचिवालय की पहुंच एवं लाभ-साझाकरण इकाई के प्रमुख डॉ. तौकोंदजो शिकोंगो भी उपस्थित रहे।
चार प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन
सम्मेलन के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने जैव विविधता और संरक्षण से जुड़े चार महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें ‘भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (आई-ओईसीएम) को नामित करने के लिए दिशा-निर्देश, 2026’, ‘कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट’, ‘जैव विविधता संधि पुस्तिका: संदर्भ मार्गदर्शिका और भारतीय परिप्रेक्ष्य’ तथा ‘भारत की पहुंच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) की सफलता की गाथा’ शामिल हैं। श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ये प्रकाशन संरक्षण संबंधी योगदानों की पहचान करने, संस्थागत समझ को मजबूत करने और कार्यान्वयन की प्रगति पर रिपोर्टिंग करने में सहायक होंगे।
सतत वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
अपने संबोधन में श्री यादव ने कहा कि देशों की जिम्मेदारी केवल लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए संसाधन जुटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने पर्यावरण के लिए जीवनशैली (लाइफ) के सिद्धांत का जिक्र करते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने नागोया प्रोटोकॉल के तहत आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे को रेखांकित किया। आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री और सीबीडी सचिवालय के अधिकारियों ने जैव विविधता संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना की।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB






