Shopping cart

No Widget Added

Please add some widget in Offcanvs Sidebar

TnewsTnews
  • Home
  • India
  • भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हुई, एशिया में पहले स्थान पर देश
India

भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हुई, एशिया में पहले स्थान पर देश

भारत में प्राकृतिक आर्द्रभूमि और झील का एक सामान्य दृश्य

नई दिल्ली | भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों यानी रामसर स्थलों के नेटवर्क का दायरा वर्ष 2014 से लगातार बढ़ रहा है और अब यह संख्या बढ़कर 103 तक पहुँच गई है। वर्ष 2014 में देश में ऐसे नामित स्थलों की संख्या मात्र 26 थी, जो अब लगभग चार गुना हो चुकी है। ये सभी पारिस्थितिक तंत्र 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। इन स्थलों की संख्या के आधार पर भारत का नेटवर्क वर्तमान में एशिया में प्रथम और विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है।

रामसर स्थलों का विस्तार और वर्गीकरण

भारत के ये रामसर स्थल ऊँचाई पर स्थित झीलों, नदी के बाढ़ मैदानों, मैंग्रोव वनों, प्रवाल भित्तियों, गाँवों के तालाबों और शहरी दलदली क्षेत्रों तक विस्तृत हैं। राज्यों के आधार पर तमिलनाडु में सबसे अधिक 20 स्थल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है। अकेले वर्ष 2025 में 11 आर्द्रभूमियों को इस सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद जून 2026 में उत्तर प्रदेश स्थित सुरहा ताल को 100वाँ स्थल और अगस्त में ग्लॉ झील को 101वाँ स्थल बनाया गया। इसके पश्चात चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को शामिल किए जाने के बाद 15 अक्टूबर 2026 तक देश में कुल रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई। ऐतिहासिक रूप से 1 फरवरी 1982 को भारत इस कन्वेंशन का पक्षकार बना था, जबकि ओडिशा की चिल्‍का झील और राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को 1 अक्टूबर 1981 को देश के पहले रामसर स्थलों के रूप में मान्यता मिली थी।

संरक्षण के लिए सरकारी पहलें और नियम

आर्द्रभूमियों के वैज्ञानिक और जनभागीदारी आधारित संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन कर रही है। आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर प्राधिकरणों की स्थापना की गई है, जो अतिक्रमण और कचरा डालने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाते हैं। इसके अतिरिक्त जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय योजना (एनपीसीए), अमृत धरोहर, मिष्टी और मिशन सहभागिता जैसी पहलों के माध्यम से दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुदृढ़ता सुनिश्चित की जा रही है। जनवरी 2025 में इंदौर और उदयपुर भारत के पहले ऐसे शहर बने जिन्हें रामसर आर्द्रभूमि शहर प्रत्यायन प्राप्त हुआ।

Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India

Photo: PIB

Related Posts