नई दिल्ली | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा असम की राजधानी गुवाहाटी में आठ दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान मंत्रालय द्वारा आयोजित यह दूसरा मेला है, जो गुवाहाटी के खानापारा स्थित फार्म गेट पर लगाया गया है। इस मेले में देशभर और पूर्वोत्तर राज्यों के शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार, 28 अक्टूबर तक चलने वाला यह मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहता है, जहां आगंतुक पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की समृद्ध विरासत को देख रहे हैं।
मेले में शिल्पकारों का प्रदर्शन और गतिविधियां
इस आयोजन में कुल 75 शिल्पकार भाग ले रहे हैं, जिनमें 31 महिला शिल्पकार शामिल हैं जो हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 किस्मों का प्रदर्शन कर रहे हैं। आगंतुक न केवल पारंपरिक उत्पादों की विविध श्रृंखला देख रहे हैं बल्कि इन कृतियों को खरीदकर शिल्पकारों का सहयोग भी कर रहे हैं। इसके अलावा, आगंतुक अनेक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का भी आनंद ले रहे हैं। इस मेले का उद्देश्य शिल्पकारों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, सीधे आगंतुकों को बेचने और बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने का एक बड़ा मंच प्रदान करना है।
आर्थिक सशक्तीकरण और भारत-ट्यूलिप पहल
यह मेला तीन राष्ट्रीय निगमों—राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम—से जुड़े शिल्पकारों को विपणन सहायता प्रदान कर रहा है। मेले के दौरान ‘भारत-ट्यूलिप’ पहल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भौतिक बिक्री केंद्रों और ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से उत्पादों के विपणन को सुगम बनाना है। इस आयोजन का मकसद अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई मित्रों और विमुक्त जनजातियों के शिल्पकारों का आर्थिक सशक्तीकरण करना तथा पारंपरिक कलाओं और शिल्पों का संरक्षण करना है।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











