नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिल्ली-एनसीआर के लिए दुनिया की अपनी तरह की पहली ‘एयर पॉल्यूशन एनालिसिस’ सुविधा का उद्घाटन किया है। इस नई सुविधा का नाम ‘एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला’ (एएटीएएल) है, जो वायु प्रदूषण के वास्तविक समय के स्रोतों की पहचान करने के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। इस उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव और आईएमडी के महानिदेशक डॉ. महापात्रा भी उपस्थित रहे।
एएटीएएल प्रयोगशाला की विशेषताएं और उद्देश्य
यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘मिशन मौसम’ के तहत स्थापित की गई है। यह सुविधा केवल एक्यूआई की संख्या बताने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि दिल्ली की हवा को क्या प्रदूषित कर रहा है, यह प्रदूषण कहां से आ रहा है और इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभाव क्या हैं। प्रयोगशाला में सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम 2.5), धातु, जहरीले तत्व और अन्य घटकों की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने के लिए उन्नत उपकरण मौजूद हैं। यह वैज्ञानिकों को यह जांचने में मदद करती है कि प्रदूषक वातावरण में कैसे बदलते हैं और समग्र प्रदूषण बोझ में विभिन्न घटक कैसे योगदान देते हैं।
स्रोतों की पहचान और निर्णय समर्थन प्रणाली
यह प्रयोगशाला वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधि, बायोमास, फसल-अवशेष जलाने, निर्माण और सड़क की धूल जैसे विभिन्न प्रदूषण स्रोतों के बीच अंतर करने में मदद करती है। यह सुविधा आईआईटीएम के ‘एयरवाइज’ (वायु गुणवत्ता चेतावनी और उत्सर्जन के लिए एकीकृत निर्णय समर्थन प्रणाली) के साथ एकीकृत है, जो अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर वायु-गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रदान करती है। इससे सीएक्यूएम और अन्य प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों को लक्षित हस्तक्षेप करने और उनकी प्रभावशीलता का आकलन करने में मदद मिलेगी।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











