नई दिल्ली | केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के अंतर्गत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में आयोजित ई-कचरा निपटान गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप के व्यवस्थित निपटान के महत्व और अप्रचलित कार्यालय उपकरणों के अवशिष्ट मूल्य को पहचानने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम के दौरान विभाग की सचिव सुश्री रचना शाह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
स्वच्छता प्रणालियों को सुदृढ़ करने का अभियान
गांधी जयंती से पटेल जयंती तक चलने वाले इस एक महीने के समर्पित अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता प्रणालियों को सुदृढ़ करना और इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करना है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष नए अनुभवों के आधार पर अभियानों में नए तत्वों को शामिल किया जाता है। इस बार GeM पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप के व्यवस्थित निपटान को अपनाया गया है, जिससे यह साबित होता है कि पुराने और अप्रचलित उपकरणों को केवल कचरा नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उनके अवशिष्ट मूल्य का लाभ उठाया जा सकता है। मंत्री ने शुरुआती 15-17 दिनों में स्क्रैप निपटान से लगभग 490 करोड़ रुपये मिलने का हवाला देते हुए विश्वास जताया कि 31 अक्टूबर तक यह राजस्व दोगुने से भी अधिक हो जाएगा।
विभिन्न श्रेणियों में ई-कचरा और आरक्षित मूल्य
विभाग द्वारा 30 सितंबर, 2026 को GeM पोर्टल पर आईटी उपकरणों, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और फर्नीचर की तीन श्रेणियों के लिए नीलामी नोटिस जारी किए गए थे। इनमें 152 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 35 प्रिंटर, 8 स्कैनर, 3 फोटोकॉपी मशीनें, 59 यूपीएस यूनिट, 52 एयर कंडीशनर, 4 टेलीविजन, 5 रेफ्रिजरेटर, 17 वाटर डिस्पेंसर और 217 विविध वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा फर्नीचर श्रेणी में कुर्सियां, मेज, अलमारियां, सोफे और वर्कस्टेशन भी रखे गए हैं। इन सभी अप्रचलित वस्तुओं का कुल अनुशंसित आरक्षित मूल्य लगभग 9 लाख रुपये तय किया गया है।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











