नई दिल्ली | अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में निवेश, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात अवसरों को मजबूत करने के उद्देश्य से भोपाल में मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के निवेशकों, निर्यातकों, मछली पालकों, उद्यमियों और विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
दिशा-निर्देश और प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी
इस सम्मेलन के दौरान मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात दिशा-निर्देश, 2026 और अंतर्देशीय राज्य निर्यात क्षमता संबंधी मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की गईं। केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मध्य प्रदेश में जलाशयों के एकीकृत विकास के लिए प्रशासनिक स्वीकृति सौंपी। इस पहल के तहत राज्य के 49 जलाशयों के विकास के लिए 8,755.60 लाख रुपये और 5 अमृत सरोवरों के विकास के लिए 69 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है। इसके साथ ही एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया गया।
मछली उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर जोर
वर्ष 2024-25 में भारत का कुल मत्स्य उत्पादन 197.75 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया था, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 151.60 लाख मीट्रिक टन रहा। अधिकारियों ने बताया कि देश के अंतर्देशीय राज्यों की कुल मत्स्य निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए शीत भंडारण अवसंरचना, गुणवत्ता प्रमाणन और प्रभावी प्रचालन तंत्र को विकसित करना आवश्यक है। राज्य सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अगले दो से तीन वर्षों में मछली उत्पादन को बढ़ाकर 10 से 11 लाख टन तक पहुंचाना है, जिससे मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB







