नई दिल्ली | भारतीय नौसेना की पानी के नीचे की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम एनर्जी मॉड्यूल की ‘काम शुरू करना चरण-2’ (सेटिंग टू वर्क फ़ेज़-2) गतिविधि का उद्घाटन किया गया है। यह प्रणाली डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की पानी के नीचे रहने की क्षमता को काफी हद तक बढ़ाती है, क्योंकि यह उनके वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करती है।
उद्घाटन समारोह और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
यह उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर, 2026 को गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने वर्चुअल माध्यम से इस समारोह में हिस्सा लिया। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के सामग्री प्रमुख वाइस एडमिरल बी शिवकुमार और डीआरडीओ के महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) डॉ. आर बाला मुरलिकृष्णन एल एंड टी हजीरा में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहे।
अगले चरण की योजना और परीक्षण प्रक्रिया
इस अवसर पर डीआरडीओ के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि एआईपी प्रणाली के लिए नौसेना की शामिल करने की समयसीमा को पूरा करने की दिशा में अगले चरणों पर काम किया जाना चाहिए। साथ ही, हाइड्रोजन और ईंधन सेल प्रणाली की आवश्यक सुरक्षा संस्कृति को बिना किसी समझौते के बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अगले चरण में एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल को विद्युत उत्पादन के लिए सक्रिय किया जाएगा और भारतीय नौसेना की प्रक्रियाओं के अनुसार इसका कड़ा परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद, इसे 2027 की शुरुआत में कालवारी-क्लास पनडुब्बी पर एकीकरण के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंप दिया जाएगा।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB











