नई दिल्ली | कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा नई दिल्ली के कौशल भवन में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) की एक राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अप्रेंटिसशिप संबंधी जुड़ाव को मजबूती देना और इसे केवल एक वैकल्पिक उपाय के बजाय सीखने से लेकर आजीविका तक का एक मुख्य मार्ग बनाना था। समीक्षा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि युवाओं को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ-साथ कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव भी मिलना बेहद आवश्यक है, जिससे वे उद्योग की जरूरतों के मुताबिक पूरी तरह तैयार हो सकें।
ठोस परिणामों और समावेशन पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि अब केवल संख्या बढ़ाने के बजाय ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम के विस्तार के दौरान हमारा मुख्य लक्ष्य यह होना चाहिए कि यह युवाओं को क्या हासिल करने में सक्षम बनाता है। केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम गुणवत्तापूर्ण अवसरों का दायरा बढ़ाकर, महिलाओं तथा कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की भागीदारी को बढ़ावा देकर और सार्थक रोजगार के लिए मजबूत रास्ते तैयार करके एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का आकलन प्रशिक्षुओं द्वारा अप्रेंटिसशिप पूरी करने, प्रमाणन प्राप्त करने, रोजगार पाने की क्षमता और कार्यस्थल पर उनके टिकाऊपन के आधार पर किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना की प्रगति और भावी कार्ययोजना
राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस-2) के तहत देश में अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम का उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से लेकर 22 सितंबर 2026 तक कुल 47,452 सक्रिय प्रतिष्ठानों के सहयोग से 44.75 लाख प्रशिक्षुओं को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इस पूरी अवधि में कुल अप्रेंटिसशिप जुड़ाव के अंदर वैकल्पिक व्यवसायों की हिस्सेदारी 76.27 प्रतिशत रही है, जो नियोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप इसके बढ़ते महत्व को साबित करती है।
समीक्षा बैठक के दौरान सभी सीपीएसई को यह निर्देश दिए गए कि वे अप्रेंटिसशिप की संभावनाओं और वास्तविक रूप से जोड़े गए प्रशिक्षुओं के बीच मौजूद अंतराल को जल्द से जल्द खत्म करें। इसके लिए उद्यमों को 2.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की अनिवार्य आवश्यकता के अनुसार व्यावहारिक भर्ती योजनाएं तैयार करनी होंगी। साथ ही, श्रम बल और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करने, समयबद्ध कार्ययोजना बनाने और किसी भी प्रकार की बाधा को दूर करने के लिए वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB






