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भारत में स्वच्छ ऊर्जा का नया स्तंभ बन रहा हरित हाइड्रोजन

स्वच्छ ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र का दृश्य

नई दिल्ली | भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में हरित हाइड्रोजन एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है। नवीकरणीय बिजली का उपयोग करके पानी को विभाजित कर इसका उत्पादन किया जाता है। यह तकनीक उर्वरक उत्पादन, पेट्रोलियम शोधन, लोहा और इस्पात विनिर्माण, भारी शुल्क सड़क परिवहन और शिपिंग जैसे कठिन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में खासी मददगार साबित हो रही है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और उत्पादन

जनवरी 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्वीकृत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) का लक्ष्य 2030 तक सालाना कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) उत्पादन क्षमता हासिल करना है। निर्यात मांग को देखते हुए यह आंकड़ा सालाना 10 एमएमटी तक पहुंच सकता है। इस दिशा में पानी के विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) के माध्यम से सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त नवीकरणीय बिजली का उपयोग करके हरित हाइड्रोजन का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए मुख्य उपकरण के रूप में इलेक्ट्रोलाइज़र का उपयोग होता है, जिसमें प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन के लिए लगभग नौ लीटर डीमिनरलाइज्ड पानी की आवश्यकता होती है। अगस्त 2023 में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने भारत के हरित हाइड्रोजन मानक को अधिसूचित किया, जिसके तहत वेल-टू-गेट आधार पर प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन के लिए 2 किलोग्राम CO2 से अधिक उत्सर्जन नहीं होने की सीमा तय की गई है।

प्रमुख अनुप्रयोग और प्रगति

हरित हाइड्रोजन का उपयोग उर्वरक, रिफाइनरियों, स्टील निर्माण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ाया जा रहा है। भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का उद्घाटन 17 जुलाई 2026 को जींद-सोनीपत सेक्शन पर किया गया, जिसमें लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। इसके अलावा दीनदयाल पोर्ट (कांडला), वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट (तूतीकोरिन) और पारादीप पोर्ट को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दी गई है। जुलाई 2025 में कांडला पोर्ट पर स्वदेशी तकनीक से बना 1 मेगावाट का हरित हाइड्रोजन प्लांट भी शुरू किया गया था। सरकार का यह व्यापक दृष्टिकोण 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण और 2070 तक ‘नेट-जीरो’ उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India

Photo: PIB

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