नई दिल्ली | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दोनों विभागों के तत्वावधान में देशभर में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ चलाया जा रहा है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक कृषि की नवीनतम तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे पहुंचाना है। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से रबी फसलों के बेहतर प्रबंधन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को साकार करते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों के खेतों तक पहुंचकर अनुसंधान आधारित जानकारियां साझा कर रहे हैं। इस अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तरी जिलों के 25 स्थानों का चयन किया गया है, जहां कृषि विशेषज्ञों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), उजवा, दिल्ली द्वारा दिल्ली देहात के विभिन्न गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गठित प्रत्येक टीम में 4 से 5 विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, विभिन्न विभागों के अधिकारी और नवोन्मेषी किसान शामिल हैं, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी भाग ले रहे हैं।
काजीपुर गांव में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
इसी कड़ी में कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली द्वारा 27 अक्टूबर, 2026 को काजीपुर गांव में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, आगामी रबी फसलों के लिए समय पर किए जाने वाले कृषि कार्यों, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती के महत्व के प्रति जागरूक करना था। वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, फसलों में समय पर आवश्यक कार्य करने तथा उर्वरकों व अन्य कृषि आदानों का वैज्ञानिक और आवश्यकता-आधारित उपयोग करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने और कृषि संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया।
रबी फसलों की उन्नत किस्में और कीट प्रबंधन
आगामी रबी मौसम को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं की अधिक उत्पादन क्षमता वाली उन्नत किस्मों, उपयुक्त फसल प्रबंधन और संतुलित उर्वरक प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा, सरसों की फसल की नियमित निगरानी, प्रमुख कीटों और रोगों की समय पर पहचान तथा उनके समुचित प्रबंधन के उपायों के बारे में भी जागरूक किया गया, ताकि फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती सहित टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB






