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भारत ने अंतर्देशीय लघु मत्स्य पालन कार्य योजना के विकास चरण में किया प्रवेश

झील में नाव पर मछली पकड़ते हुए मछुआरे

नई दिल्ली | भारत ने अंतर्देशीय लघु मत्स्य पालन के लिए एक विशेष राष्ट्रीय कार्य योजना के विकास चरण की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य मीठे जल संसाधनों का उचित प्रबंधन करना, बेहतर समन्वय स्थापित करना और आजीविका के स्तर में सुधार लाना है। मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने इस विकास चरण का शुभारंभ किया। यह पूरी पहल संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के निर्धारित ढांचे के अंतर्गत आगे बढ़ाई जा रही है, जिसमें केंद्रीय मत्स्य विभाग बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (बीओबीपी-आईजीओ) का भरपूर सहयोग ले रहा है।

राष्ट्रीय कार्यशाला और भविष्य की प्राथमिकताएं

भोपाल शहर में एक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन संपन्न हुआ, जहां इस कार्य योजना को विस्तृत रूप देने के लिए कई प्रमुख प्राथमिकताओं और बिंदुओं पर मुहर लगाई गई। इस दौरान मछली पकड़ने वाले स्थानीय समुदायों के साथ-साथ अन्य संबंधित हितधारकों के परामर्श से जुड़ा एक प्रस्तावित कार्यक्रम भी तय किया गया। मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने मिलकर विकास चरण की गतिविधियों का ठोस ढांचा तैयार किया है। डॉ. अभिलक्ष लिखी ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस कार्य योजना को केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देश के सुदूर इलाकों तक पहुंचाकर मछुआरों की आजीविका में व्यावहारिक और सकारात्मक बदलाव लाना होगा। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के संकट और जल गुणवत्ता में आ रही गिरावट से निपटने के लिए मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई।

उत्पादन लक्ष्य और निर्यात की उम्मीदें

संबोधन के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारत ने आने वाले अगले पांच वर्षों के भीतर 3 करोड़ टन मछली उत्पादन का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो देश में हर साल 19.7 मिलियन टन मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन की हिस्सेदारी लगभग तीन-चौथाई दर्ज की गई है। साथ ही, देश का समुद्री खाद्य निर्यात बढ़कर 70,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है और आगामी समय में इसके 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की प्रबल संभावना जताई गई है।

बीओबीपी-आईजीओ के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने बताया कि इस महत्वपूर्ण विकास चरण के दौरान मछली पकड़ने के कानूनी अधिकार, संसाधन प्रबंधन, रोजगार के अवसर, लैंगिक समानता और मूल्य श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस प्रस्तावित योजना को अगले महीने आधिकारिक रूप से जनता के सामने जारी किया जाएगा और उसके बाद तमाम हितधारकों की राय लेकर इसे पूरी तरह अंतिम रूप दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद छोटे स्तर के मछुआरों के हितों की रक्षा करना और देश के विविध जल स्रोतों में सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है।

Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India

Photo: PIB

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