नई दिल्ली | पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक चौथी वर्चुअल बैठक का आयोजन किया है। यह बैठक 1-2 सितंबर 2026 को आयोजित विभागीय जल शिखर सम्मेलन 2026 के अनुवर्ती विषयगत परामर्शों के तहत की गई है। इस वर्चुअल सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 और 16वें वित्त आयोग के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना था, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्थिरता और सुरक्षित पेयजल सेवा वितरण की योजना को बढ़ावा मिल सके।
ग्रामीण जल प्रशासन में ग्राम पंचायतों की भूमिका और वित्तपोषण
सम्मेलन में डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक के.के. मीणा ने बताया कि जेजेएम 2.0 के विस्तार के बाद अब ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर कार्यक्षमता और गुणवत्तापूर्ण सेवा वितरण पर केंद्रित हो गया है। उन्होंने जोर दिया कि ग्राम पंचायतों को वार्षिक संचालन एवं रखरखाव योजना तैयार करने में नेतृत्व करना चाहिए। 16वें वित्त आयोग के ढांचे के तहत कुल ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदानों में से एक बड़ा हिस्सा जल और स्वच्छता गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसका उपयोग नए बुनियादी ढांचे के बजाय मौजूदा संपत्तियों के रखरखाव और सुधार के लिए किया जाना चाहिए।
राज्य स्तर के अनुभव और आगामी रणनीतियां
इस वर्चुअल सम्मेलन के दौरान कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने अपने जमीनी अनुभव और सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा किया। कर्नाटक ने जीआईएस-आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन और जल बजट के अपने मॉडल को रखा, जबकि ओडिशा ने डिजिटल निगरानी और सौर ऊर्जा आधारित पहलों की जानकारी दी। मध्य प्रदेश ने अपने नए संचालन एवं रखरखाव नियमों को प्रदर्शित किया। इसके अलावा, एनजेजेएम की उप सचिव कृतिका कुलहारी और पंचायती राज मंत्रालय के निदेशक विपुल उज्ज्वल ने वित्त आयोग के अनुदानों और ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन का समापन पंचायत-नेतृत्व वाली योजना को मजबूत करने और टिकाऊ पेयजल सेवाओं को सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB






