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भारतीय रेलवे ने 3,000 किलोमीटर ट्रैक पर ‘कवच 4.0’ सुरक्षा प्रणाली का काम पूरा किया

a train on a steel track

नई दिल्ली | अक्टूबर 10: भारतीय रेल ने देश के उच्च घनत्व वाले यात्री और माल ढुलाई रेल मार्गों पर अपनी स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली ‘कवच 4.0’ का विस्तार करते हुए 3,000 से अधिक रूट किलोमीटर पर संस्थापन और परीक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रेल मंत्रालय द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर को पूरी तरह रोकना, लाल सिग्नल पार होने की मानवीय भूल पर स्वतः ब्रेक लगाना और प्रतिकूल मौसम में ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना है।

रेडियो फ्रिक्वेंसी और आरएफआईडी तकनीक से स्वचालित नियंत्रण ‘कवच 4.0’ आधुनिकतम संचार प्रणाली, लोकोमोटिव में लगे कंप्यूटर यूनिट्स और ट्रैक पर स्थापित आरएफआईडी (RFID) सेंसर पर आधारित है। यदि कोई लोको पायलट किसी कारणवश लाल सिग्नल पार करता है या निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार में गाड़ी चलाता है, तो यह प्रणाली तुरंत सतर्कता सायरन बजाती है। यदि चालक द्वारा निर्धारित समय में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती, तो प्रणाली स्वचालित रूप से ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम को सक्रिय कर देती है, जिससे रेल दुर्घटना की संभावना शून्य हो जाती है।

घने कोहरे और खराब दृश्यता के दौरान भी यह प्रणाली लोको केबिन के डिस्प्ले पर अगले सिग्नल की स्थिति और दूरी की सटीक जानकारी उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त, रेलवे स्टेशनों के मास्टर नियंत्रण कक्ष और केंद्रीय ट्रैफ़िक सिस्टम से ट्रेनों की वास्तविक स्थिति और गति पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे आपात स्थिति में केंद्रीय स्तर से भी ट्रेनों को सुरक्षित रोका जा सकता है।

गोल्डन क्वाड्रिलेटरल मार्गों पर त्वरित संस्थापन का लक्ष्य रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों पर कवच के उन्नत संस्करण को लगाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। आगामी चरण में देश के संपूर्ण ब्रॉड गेज नेटवर्क को इस सुरक्षा कवच के दायरे में लाने की योजना है। इस प्रणाली के विकास और निर्माण में निजी और सार्वजनिक विनिर्माण इकाइयों की सक्रिय भागीदारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि इस उन्नत तकनीक के व्यापक प्रयोग से न केवल यात्री सुरक्षा के उच्चतम मानक स्थापित होंगे, बल्कि ट्रेनों की औसत परिचालन गति में भी सुधार दर्ज किया जाएगा। आगामी महीनों में अन्य प्रमुख क्षेत्रीय डिवीजनों में भी इसका सुरक्षा परीक्षण शुरू किया जाएगा।

Source: Railway Board & Ministry of Railways Press Bureau

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