मुंबई | अक्टूबर 9: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक में नीतिगत रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से समिति ने सर्वसम्मति से यह सख्त रुख अपनाया है।
ऋण और जमा दरों पर सीधा असर रेपो रेट में हुई इस वृद्धि के बाद बैंकों द्वारा फंड की सीमांत लागत (MCLR) और बाहरी बेंचमार्क-आधारित उधारी दरों में संशोधन की संभावना है। इसके चलते होम लोन, ऑटो लोन और व्यक्तिगत ऋण की ईएमआई में मामूली वृद्धि हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और आवर्ती जमा (RD) की ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी का रास्ता साफ हुआ है।
आर्थिक विकास दर का संतुलित अनुमान केंद्रीय बैंक ने अपने बयान में कहा कि घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र में मजबूत गति बनी हुई है, जिससे आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मूल्य स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। रिजर्व बैंक आगामी तिमाहियों में मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर कड़ी निगरानी रखेगा।
Source: Reserve Bank of India Monetary Policy Statement





