नई दिल्ली | भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आगामी शीत ऋतु को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को काफी मजबूत कर दिया है। इसके तहत सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने और हवा को साफ रखने के लिए व्यापक स्तर पर मशीनरी और श्रमिकों की तैनाती की गई है, जिससे बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
उपकरणों और श्रमिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती
प्राधिकरण ने धूल नियंत्रण उपायों के लिए लगभग 60 वाटर स्प्रिंकलर और टैंकर, 14 एंटी-स्मॉग गन, 23 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, दो ट्रैक्टर-माउंटेड ब्रूमर और 900 से अधिक श्रमिकों को मैदान में उतारा है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-एनसीआर के भीतर 157 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर 13 आधुनिक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें भी निरंतर संचालित हो रही हैं। एनएचएआई के तकनीकी सदस्य श्री आलोक दीपांकर ने इन तमाम प्रदूषण नियंत्रण उपायों की विस्तृत समीक्षा की और मैदानी टीमों को उपकरणों, श्रमिकों तथा पानी के छिड़काव की पूर्ण तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पर्यावरण और यातायात सुगमीकरण की पहल
पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए, एनएचएआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 9.52 लाख के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 9.80 लाख पौधे लगाए, जिनकी उत्तरजीविता दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके साथ ही, दिल्ली के लैंडफिल स्थलों से लगभग 13.58 लाख टन अक्रिय सामग्री निकालकर उसका उपयोग यूईआर-II और डीएनडी-सोहना कॉरिडोर के तटबंध निर्माण में किया गया है। समीक्षा बैठक के दौरान शहरी विस्तार सड़क-II, द्वारका एक्सप्रेसवे, डीएनडी-सोहना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसी प्रमुख यातायात सुगमीकरण परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई, जो क्षेत्र में वाहनों के उत्सर्जन और ट्रैफिक की भीड़-भाड़ को कम करने में मददगार साबित हो रही हैं।
Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India
Photo: PIB







