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भारत मंडपम में 7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन का एक दृश्य

नई दिल्ली | देश की राजधानी के भारत मंडपम में तीन दिवसीय ‘7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृषि और सौर ऊर्जा के अनूठे तालमेल के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नए रास्ते खोलना है। कार्यक्रम में देश-विदेश के कई गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया।

अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता बनेंगे किसान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का किसान अब केवल अन्नदाता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सौर ऊर्जा को अपनाकर ऊर्जादाता भी बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्रीवोल्टाइक नीति का निर्माण करते समय देश के 85 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस तकनीक के माध्यम से एक ही कृषि भूमि पर ऊपर सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन होगा और नीचे फसलें लहलहाती रहेंगी।

स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य की योजनाएं

समारोह में उपस्थित केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि देश की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 308 गीगावाट को पार कर चुकी है। उन्होंने ‘टेरी’ के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि यदि उपयुक्त कृषि भूमि के मात्र 10 प्रतिशत हिस्से पर भी एग्रीवोल्टाइक को अपनाया जाए, तो वर्ष 2050 तक देश की बिजली की मांग पूरी की जा सकती है। इसके साथ ही पीएम कुसुम योजना के अगले चरण में दुनिया का सबसे बड़ा एग्रीवोल्टाइक अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Source: Press Information Bureau (PIB), Government of India

Photo: PIB

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